अप्रत्याशित कूटनीति पर भारत का करारा जवाब: जयशंकर ने ट्रंप की विदेश नीति को चुनौती दी
हाल के दिनों में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ देखा गया है। नई दिल्ली में आयोजित द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के प्रति अपने दृष्टिकोण पर एक तीखी और सीधी टिप्पणी प्रस्तुत की है। जयशंकर की यह आलोचना ट्रंप प्रशासन की 'अभूतपूर्व' सार्वजनिक कूटनीति और भारत के साथ व्यापारिक तनावों के बीच आई है, जिसने दशकों में द्विपक्षीय संबंधों पर सबसे गंभीर दबाव डाला है।
जयशंकर ने स्पष्ट रूप से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा की, जबकि उन्होंने ट्रंप की उस कूटनीति की आलोचना की जिसे उन्होंने 'अभूतपूर्व सार्वजनिक कूटनीति रणनीति' कहा। उनके अनुसार, ट्रंप की शासन शैली "पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से एक बड़ा विचलन" है, यह देखते हुए कि "हमारे पास ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं रहा है जिसने वर्तमान राष्ट्रपति की तरह इतनी सार्वजनिक रूप से विदेश नीति का संचालन किया हो"। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह दृष्टिकोण केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनयिक संबंधों को प्रभावित कर रहा है।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी-भारत व्यापार वार्ता कथित तौर पर ठप हो गई है, और शुल्क भारत के $86.5 बिलियन के वार्षिक निर्यात को खतरे में डाल रहे हैं, जो हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। इस राजनयिक गतिरोध ने दोनों देशों के बीच संबंधों पर एक गहरी छाया डाल दी है, जो फरवरी 2025 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान "मेगा पार्टनरशिप" और "MAGA प्लस MIGA, यह मेगा बन जाता है" जैसे वाक्यांशों के साथ व्यक्त किए गए विश्वास और सद्भावना के बिल्कुल विपरीत है।
रूसी तेल पर व्यापारिक तनाव: दोहरे मापदंडों का मुद्दा
भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा विवाद के मूल में भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद है, विशेष रूप से पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद। यह मुद्दा ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय सामानों पर बढ़ते शुल्क लगाने का कारण बना है। वर्तमान में, अमेरिका भारतीय निर्यात पर 25% शुल्क लगाता है, और रूस के साथ ऊर्जा संबंधों के लिए 27 अगस्त को अतिरिक्त 25% जुर्माना प्रभावी होने वाला है। जुलाई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त, 2025 से भारतीय सामानों पर 25% शुल्क की घोषणा की थी, और रूस के साथ भारत के ऊर्जा और सैन्य संबंधों के जवाब में अतिरिक्त दंड की चेतावनी भी दी थी।
जयशंकर ने भारत की स्थिति का जोरदार बचाव किया है, अमेरिकी नीति में दोहरे मापदंडों का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका भारत को लक्षित कर रहा है जबकि अन्य राष्ट्र, जिनमें अमेरिकी सहयोगी भी शामिल हैं, रूस के साथ अपना व्यापार जारी रखते हैं। उन्होंने एक शक्तिशाली बयान दिया, "अगर आपको यह पसंद नहीं है, तो इसे मत खरीदो। लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है"। यह बयान अमेरिकी नीति की पाखंडिता पर सीधा प्रहार था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चीन, "रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक", समान दंड का सामना क्यों नहीं करता जबकि भारत को लक्षित किया जाता है।
जयशंकर ने स्पष्ट रूप से इस मुद्दे को "गलत तरीके से तेल विवाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है" के रूप में वर्णित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "रूस-यूरोपीय व्यापार भारत-रूस व्यापार से बड़ा है", जिससे यह तर्क दिया गया कि भारत को अकेले दंडित करना अनुचित है। इस प्रकार, उन्होंने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि भारत को निशाना बनाना व्यापक वैश्विक व्यापार परिदृश्य को अनदेखा करता है।
जयशंकर ने शुल्कों के संबंध में अपनी नाराजगी को विभिन्न तरीकों से व्यक्त किया है, जिसमें सीधी चुनौतियाँ, व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ और राजनयिक उलझन की अभिव्यक्तियाँ शामिल हैं। इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में, उन्होंने रूस के साथ भारत के व्यापार का जोरदार बचाव करते हुए कहा, "अगर आपको यह पसंद नहीं है, तो इसे मत खरीदो। लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है"। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "अगर आपको भारत से तेल या परिष्कृत उत्पाद खरीदने में समस्या है, तो इसे मत खरीदो। कोई भी आपको इसे खरीदने के लिए मजबूर नहीं करता"। यह वाक्यांश भारत के अपने आर्थिक निर्णय लेने के संप्रभु अधिकार के दावे को रेखांकित करता है।
एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में, जयशंकर ने अमेरिकी स्थिति में विरोधाभास को उजागर किया, यह टिप्पणी करते हुए कि "एक व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लिए अन्य लोगों पर व्यापार करने का आरोप लगाना हास्यास्पद है"। यह बयान ट्रंप प्रशासन की भारत की वैध व्यावसायिक गतिविधियों की आलोचना पर लक्षित था। मास्को में रहते हुए, जयशंकर ने कहा कि वह अमेरिकी शुल्कों के "तर्क से चकित" थे। उन्होंने यह इंगित करके इसका समर्थन किया कि अन्य देश रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं और अमेरिका ने स्वयं भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने यह भी नोट किया कि चीन, न कि भारत, रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और अमेरिका से भारत के तेल आयात में भी वृद्धि हुई है। ये सभी बिंदु अमेरिका के आरोपों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हैं और भारत के खिलाफ लगाए गए शुल्कों को अनुचित ठहराते हैं।
भारत की 'रेड लाइन्स': किसानों और छोटे उत्पादकों के हित
अमेरिकी दबाव का सामना करते हुए, जयशंकर ने व्यापार वार्ता में भारत की गैर-परक्राम्य स्थितियों को रेखांकित किया है, जो वर्तमान में ठप पड़ी हुई हैं। उन्होंने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की सुरक्षा को सरकार के लिए एक "रेड लाइन" के रूप में विशेष रूप से जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "हमारी कुछ रेड लाइन्स हैं। मुख्य बात हमारे किसानों और कुछ हद तक हमारे छोटे उत्पादकों के हित हैं"।
भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों का उदारीकरण एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि देश की लगभग आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है। जयशंकर ने इन मुख्य मुद्दों पर किसी भी समझौते को अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि सरकार किसानों और छोटे उत्पादकों की रक्षा के लिए "बहुत दृढ़" है। यह भारत की अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं और घरेलू हितों की रक्षा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, भले ही इसके परिणामस्वरूप व्यापारिक साझेदारों के साथ तनाव क्यों न हो। "रेड लाइन्स" निर्धारित करना, हालांकि सीधे शुल्कों पर कोई फटकार नहीं है, व्यापक व्यापार विवाद को भी बताता है, यह दर्शाता है कि भारत कुछ निश्चित सीमाओं पर समझौता नहीं करेगा।
पाकिस्तान मध्यस्थता अस्वीकृत: राष्ट्रीय सहमति का मामला
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावों के जवाब में, जयशंकर ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के खिलाफ भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराया। उन्होंने घोषणा की, "1970 के दशक से, अब 50 से अधिक वर्षों से, इस देश में एक राष्ट्रीय सहमति है कि हम पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में मध्यस्थता स्वीकार नहीं करते हैं"। यह बयान भारत की संप्रभुता और अपने द्विपक्षीय मुद्दों को स्वयं हल करने की क्षमता में विश्वास पर जोर देता है। सूत्रों से यह भी पता चलता है कि भारत ने चीन के साथ तनाव में मध्यस्थता के ट्रंप के प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है। यह दर्शाता है कि यह नीति केवल पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों का हिस्सा है।
पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी उसी मंच पर ट्रंप के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि "महान राष्ट्र हमेशा हर समय लोगों को अल्टिमेटम देकर महानता प्रदर्शित नहीं करते हैं, बिना वास्तविक राजनयिक प्रयास के"। यह टिप्पणी ट्रंप की 'अभूतपूर्व' सार्वजनिक कूटनीति के लिए एक और अंतरराष्ट्रीय आलोचना थी, जो यह सुझाव देती है कि प्रभावी कूटनीति के लिए सूक्ष्मता और बातचीत की आवश्यकता होती है, न कि केवल सार्वजनिक घोषणाओं और मांगों की।
संबंधों में तनाव और आगे की राह
यह राजनयिक गतिरोध हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। भारत और अमेरिका के बीच विश्वास "हाल के दिनों में काफी कम हो गया है", जो द्विपक्षीय संबंधों पर एक गहरा असर डाल रहा है। यह एक तेज गिरावट को दर्शाता है, फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्हाइट हाउस का दौरा किया था और दोनों देशों के बीच "मेगा पार्टनरशिप" की प्रशंसा की थी, "जब अमेरिका और भारत एक साथ काम करते हैं, जब यह MAGA प्लस MIGA होता है, तो यह मेगा बन जाता है" वाक्यांश को गढ़ा था। इस वाक्यांश का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मजबूत गठबंधन को उजागर करना था, लेकिन मौजूदा तनाव इस भावना के विपरीत हैं।
जयशंकर की टिप्पणी, जिसे "ट्रंप की अभूतपूर्व कूटनीति पर खरी टिप्पणी" के रूप में वर्णित किया गया है, भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट संदेश है। यह दर्शाता है कि भारत अपनी संप्रभुता, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही इसके लिए सबसे शक्तिशाली वैश्विक शक्तियों में से एक के साथ तनाव क्यों न हो। भारत की यह स्थिति अमेरिकी प्रशासन को एक स्पष्ट संदेश देती है कि भारत के साथ कूटनीति को पारंपरिक चैनलों और सम्मान के साथ संचालित किया जाना चाहिए, न कि केवल सार्वजनिक मंचों से दबाव और अल्टीमेटम के माध्यम से।
भारत के विदेश मंत्री द्वारा उपयोग किए गए मुहावरे और वाक्यांश – "अगर आपको यह पसंद नहीं है, तो इसे मत खरीदो। लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है", "व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लिए अन्य लोगों पर व्यापार करने का आरोप लगाना हास्यास्पद है", और "रेड लाइन्स" की अवधारणा – सभी भारत की मजबूत और मुखर राजनयिक मुद्रा को दर्शाते हैं। ये बयान न केवल विशिष्ट नीतियों पर आपत्ति व्यक्त करते हैं, बल्कि एक व्यापक दर्शन को भी दर्शाते हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक स्वतंत्र अभिनेता के रूप में अपनी भूमिका निभाएगा, अपने हितों का बचाव करेगा और दोहरे मापदंडों को चुनौती देगा।
वर्तमान में, अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता अधर में लटकी हुई है, और $86.5 बिलियन के वार्षिक भारतीय निर्यात पर शुल्कों का खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रणनीतिक साझेदारी के लिए एक गंभीर चुनौती भी है जिसे पिछले प्रशासनों द्वारा सावधानीपूर्वक विकसित किया गया था। यह स्पष्ट है कि दोनों देशों को इस गतिरोध को हल करने और एक अधिक स्थिर और अनुमानित राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास करने होंगे।
अंततः, जयशंकर की टिप्पणी उस मूलभूत प्रश्न को उठाती है कि वैश्विक कूटनीति को कैसे संचालित किया जाना चाहिए। क्या यह सार्वजनिक बयानबाजी और एकतरफा दबाव के माध्यम से होना चाहिए, या क्या यह अधिक पारंपरिक, विचारशील और सम्मानजनक वार्ता के माध्यम से होना चाहिए? भारत का स्पष्ट जवाब है कि वह बाद वाले दृष्टिकोण का पक्षधर है, और वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के लिए खड़ा रहेगा, चाहे कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। यह देखना बाकी है कि यह राजनयिक टकराव अमेरिकी-भारत संबंधों को कैसे आकार देगा और क्या दोनों देश विश्वास और सहयोग के पथ पर लौट पाएंगे, जो कभी "मेगा पार्टनरशिप" के रूप में प्रतिष्ठित था।
यह स्थिति वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उदय को भी रेखांकित करती है, जहां राष्ट्र अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करने के लिए अधिक दृढ़ हैं और बड़े शक्तियों के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। जयशंकर की टिप्पणी एक मजबूत और आत्मविश्वासपूर्ण भारत की आवाज है, जो अपनी पहचान और अपने सिद्धांतों के लिए खड़ा है।
50 प्रश्नोत्तर
Q1: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किस अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति की आलोचना की?
A: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की आलोचना की।
Q2: जयशंकर ने ट्रंप के कूटनीति दृष्टिकोण को क्या बताया?
A: जयशंकर ने इसे "अभूतपूर्व सार्वजनिक कूटनीति रणनीति" और "पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से एक बड़ा विचलन" बताया।
Q3: यह आलोचना उन्होंने कहाँ व्यक्त की?
A: उन्होंने नई दिल्ली में द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में यह आलोचना व्यक्त की।
Q4: जयशंकर के अनुसार, ट्रंप का शासन शैली कैसी है?
A: यह "पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से एक बड़ा विचलन" है।
Q5: जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सार्वजनिक विदेश नीति संचालन के बारे में क्या कहा?
A: उन्होंने कहा कि "हमने कभी ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा जिसने वर्तमान राष्ट्रपति की तरह सार्वजनिक रूप से विदेश नीति का संचालन किया हो"।
Q6: ट्रंप का यह दृष्टिकोण केवल भारत तक ही सीमित है या वैश्विक है?
A: यह दृष्टिकोण भारत से परे वैश्विक राजनयिक संबंधों को प्रभावित करता है।
Q7: जयशंकर ने नई दिल्ली की किस चीज़ का बचाव किया?
A: उन्होंने नई दिल्ली की रणनीतिक स्वायत्तता का बचाव किया।
Q8: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव का मुख्य कारण क्या है?
A: तनाव का मुख्य कारण भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद है।
Q9: रूसी तेल खरीद के कारण ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर क्या लगाया है?
A: ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर बढ़ते शुल्क (टैरिफ) लगाए हैं।
Q10: वर्तमान में अमेरिकी सरकार भारतीय निर्यात पर कितना शुल्क लगाती है?
A: अमेरिका वर्तमान में भारतीय निर्यात पर 25% शुल्क लगाता है।
Q11: रूस के साथ ऊर्जा संबंधों के लिए अतिरिक्त 25% जुर्माना कब लागू होने वाला है?
A: अतिरिक्त 25% जुर्माना 27 अगस्त को लागू होने वाला है।
Q12: जयशंकर ने रूसी तेल खरीद का बचाव करते हुए अमेरिका की नीति में क्या दोहरा मापदंड बताया?
A: उन्होंने कहा, "अगर आपको यह पसंद नहीं है, तो इसे न खरीदें। लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता"।
Q13: जयशंकर ने किस देश का उदाहरण दिया जो रूस से सबसे बड़ा तेल आयातक है लेकिन उस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा?
A: उन्होंने चीन का उदाहरण दिया, जो रूस से "सबसे बड़ा तेल आयातक" है, लेकिन उसे समान दंड का सामना नहीं करना पड़ता।
Q14: जयशंकर के अनुसार, इस मुद्दे को गलत तरीके से कैसे पेश किया जा रहा है?
A: उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को "गलत तरीके से तेल विवाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है"।
Q15: रूस और यूरोप के बीच व्यापार भारत-रूस व्यापार से बड़ा है या छोटा?
A: रूस-यूरोपीय व्यापार भारत-रूस व्यापार से बड़ा है।
Q16: जुलाई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने कितने प्रतिशत शुल्क की घोषणा की थी?
A: जुलाई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर 25% शुल्क की घोषणा की थी।
Q17: यह 25% शुल्क कब प्रभावी हुआ?
A: यह 25% शुल्क 1 अगस्त, 2025 को प्रभावी हुआ।
Q18: ट्रंप ने भारत के रूसी ऊर्जा और सैन्य संबंधों के जवाब में और किन चेतावनियों का उल्लेख किया?
A: ट्रंप ने अतिरिक्त दंड की चेतावनी दी।
Q19: जयशंकर ने अमेरिकी नीति पर किस बात का आरोप लगाया?
A: जयशंकर ने अमेरिका पर पाखंड का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि वह भारत को निशाना बना रहा है जबकि अन्य राष्ट्र रूस के साथ व्यापार जारी रखते हैं।
Q20: हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच क्या "काफी कम" हो गया है?
A: हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच विश्वास "काफी कम" हो गया है।
Q21: फरवरी 2025 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने व्हाइट हाउस का दौरा करते समय अमेरिका-भारत संबंधों के बारे में क्या कहा था?
A: उन्होंने "मेगा पार्टनरशिप" की प्रशंसा की और कहा, "जब अमेरिका और भारत एक साथ काम करते हैं, जब यह MAGA प्लस MIGA होता है, तो यह मेगा बन जाता है"।
Q22: भारत ने व्यापार वार्ता में अपनी "रेड लाइन्स" के रूप में किन गैर-परक्राम्य स्थितियों को रेखांकित किया है?
A: भारत ने किसानों के हितों और छोटे उत्पादकों की सुरक्षा को अपनी गैर-परक्राम्य स्थितियों के रूप में रेखांकित किया है।
Q23: जयशंकर ने सरकार की इन मुख्य मुद्दों पर रक्षा करने की दृढ़ता के बारे में क्या कहा?
A: उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और छोटे उत्पादकों की रक्षा के लिए "बहुत दृढ़ संकल्पित" है।
Q24: भारत के किन क्षेत्रों का उदारीकरण राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है?
A: भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों का उदारीकरण एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
Q25: देश की कितनी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है?
A: देश की लगभग आधी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है।
Q26: ट्रंप ने किन दो देशों के बीच मध्यस्थता का दावा किया था, जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया?
A: ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा किया था।
Q27: भारत की तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के खिलाफ नीति कब से चली आ रही है?
A: यह नीति 1970 के दशक से, 50 से अधिक वर्षों से चली आ रही है।
Q28: भारत-पाकिस्तान संबंधों में मध्यस्थता स्वीकार न करने पर क्या कोई राष्ट्रीय सहमति है?
A: हाँ, इस देश में राष्ट्रीय सहमति है कि हम पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में मध्यस्थता स्वीकार नहीं करते हैं।
Q29: भारत ने चीन के साथ तनाव में ट्रंप की मध्यस्थता के प्रस्तावों को भी अस्वीकार किया था या नहीं?
A: हाँ, भारत ने चीन के साथ तनाव में ट्रंप की मध्यस्थता के प्रस्तावों को भी अस्वीकार कर दिया था।
Q30: पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने ट्रंप के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए क्या कहा?
A: उन्होंने कहा, "महान राष्ट्र हमेशा लोगों को वास्तविक राजनयिक प्रयास के बिना अल्टीमेटम देकर महानता का प्रदर्शन नहीं करते हैं"।
Q31: यह राजनयिक गतिरोध हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों के लिए कौन सी चुनौती प्रस्तुत करता है?
A: यह हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।
Q32: वार्षिक भारतीय निर्यात का कितना मूल्य अमेरिकी राजनयिक गतिरोध से खतरे में है?
A: $86.5 बिलियन के वार्षिक भारतीय निर्यात खतरे में हैं।
Q33: जयशंकर ने अमेरिकी शुल्कों के जवाब में ट्रंप को फटकार लगाने के लिए किन रणनीतियों का उपयोग किया?
A: उन्होंने प्रत्यक्ष चुनौतियां, विडंबनापूर्ण अवलोकन और राजनयिक उलझन की अभिव्यक्तियों का संयोजन उपयोग किया।
Q34: रूसी तेल खरीदने के भारत के संप्रभु अधिकार पर जयशंकर ने क्या टिप्पणी की?
A: उन्होंने कहा, "अगर आपको तेल या परिष्कृत उत्पाद खरीदने में कोई समस्या है, तो इसे न खरीदें। कोई भी आपको इसे खरीदने के लिए मजबूर नहीं करता है"।
Q35: जयशंकर ने अमेरिकी स्थिति में विरोधाभास पर क्या विडंबनापूर्ण टिप्पणी की?
A: उन्होंने टिप्पणी की, "एक व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लिए काम करने वाले लोगों का दूसरों पर व्यापार करने का आरोप लगाना अजीब है"।
Q36: मास्को में रहते हुए जयशंकर ने अमेरिकी शुल्कों के तर्क के बारे में क्या कहा?
A: उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी शुल्कों के तर्क से "हैरान" थे।
Q37: जयशंकर ने अपनी "हैरानी" के लिए क्या कारण बताए?
A: अन्य देश रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं, और अमेरिका ने खुद भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया था।
Q38: रूस से तेल का सबसे बड़ा खरीदार कौन सा देश है?
A: चीन रूस से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
Q39: भारत के अमेरिका से तेल आयात में क्या बदलाव आया है?
A: भारत के अमेरिका से तेल आयात में भी वृद्धि हुई है।
Q40: व्यापक व्यापार विवाद के संबंध में जयशंकर ने "रेड लाइन्स" को कैसे परिभाषित किया?
A: उन्होंने कहा कि भारत के पास वार्ता में अपनी "रेड लाइन्स" हैं, विशेष रूप से अपने किसानों और छोटे व्यवसायों की सुरक्षा के संबंध में।
Q41: जयशंकर के अनुसार, ट्रंप की विदेश नीति शैली का प्रभाव क्या है?
A: इसका प्रभाव सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक राजनयिक संबंधों को प्रभावित करता है।
Q42: मोदी ने किस दौरे के दौरान "MAGA प्लस MIGA" वाक्यांश गढ़ा था?
A: फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस के अपने दौरे के दौरान।
Q43: जयशंकर ने अमेरिका के किस आरोप को "पाखंड" बताया?
A: अमेरिका का यह आरोप कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है जबकि यूरोप और खुद अमेरिका भी ऐसा करते हैं, इसे उन्होंने पाखंड बताया।
Q44: भारत के लिए व्यापार वार्ता में "रेड लाइन्स" का "बॉटम लाइन" क्या है?
A: हमारे किसानों और, कुछ हद तक, हमारे छोटे उत्पादकों के हित।
Q45: ट्रंप के सार्वजनिक कूटनीति पर जयशंकर ने किस शब्द का प्रयोग किया, जो "पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से एक बड़ा विचलन" को दर्शाता है?
A: "अभूतपूर्व"।
Q46: भारत ने पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता के प्रस्तावों को अस्वीकार करने के लिए कितने वर्षों की राष्ट्रीय सहमति का उल्लेख किया?
A: 50 से अधिक वर्षों की राष्ट्रीय सहमति का उल्लेख किया।
Q47: द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम कहाँ आयोजित हुआ था?
A: यह फोरम नई दिल्ली में आयोजित हुआ था।
Q48: ट्रंप ने भारत पर रूसी ऊर्जा और सैन्य संबंधों के लिए क्या चेतावनी दी थी?
A: अतिरिक्त दंड की।
Q49: जयशंकर ने अपने देश की किस स्वायत्तता का बचाव किया?
A: रणनीतिक स्वायत्तता का बचाव किया।
Q50: भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में "महत्वपूर्ण गिरावट" कब से देखी गई है?
A: हाल के दिनों में विश्वास में महत्वपूर्ण कमी आई है।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें