सुनील अमृत की 'द बर्निंग अर्थ': जलवायु इतिहास की 500 वर्षों की गाथा जिसने प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता
आज के दौर में जलवायु परिवर्तन की चुनौती हमारी सभ्यता के लिए सबसे बड़ी परीक्षा है। वैज्ञानिक डेटा और नीतिगत उपायों से परे, इस संकट की जड़ों को समझने के लिए हमें इतिहास की ओर देखना होगा—कि कैसे सदियों से मानव गतिविधि ने ग्रह को बदल डाला है। इसी पृष्ठभूमि में, येल विश्वविद्यालय के इतिहासकार प्रोफेसर सुनील अमृत ने अपनी महत्वपूर्ण कृति, द बर्निंग अर्थ: एन एन्वायरनमेंटल हिस्ट्री ऑफ द लास्ट 500 इयर्स (The Burning Earth: An Environmental History of the Last 500 Years) के लिए 2025 का प्रतिष्ठित ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ (British Academy Book Prize) जीता है।
यह सम्मान, जिसकी राशि £25,000 है, गैर-काल्पनिक साहित्य के लिए विश्व के सबसे सम्मानित पुरस्कारों में से एक है। यह उन पुस्तकों को दिया जाता है जो समाज, संस्कृति और विज्ञान की हमारी समझ को गहरा करती हैं। न्यायधीशों ने इस पुस्तक की सराहना "मानव इतिहास और पर्यावरणीय परिवर्तन के बीच अंतरसंबंधों के एक शानदार विवरण" के रूप में की है।
लेखक का परिचय: सुनील अमृत और उनका वैश्विक दृष्टिकोण
प्रोफेसर सुनील अमृत का जीवन और करियर उन्हें जलवायु इतिहास के लिए एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करता है। दक्षिण भारतीय माता-पिता के घर केन्या में जन्मे और सिंगापुर में पले-बढ़े अमृत ने कैम्ब्रिज में शिक्षा प्राप्त की। उनका वैश्विक पालन-पोषण उन्हें केवल एक अकादमिक पर्यवेक्षक के रूप में ही नहीं, बल्कि प्रवास (migration) और परिवर्तन की लहरों से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित व्यक्ति के रूप में भी देखने की क्षमता देता है।
वर्तमान में येल में इतिहास के प्रोफेसर, अमृत पर्यावरण इतिहास, प्रवास और दक्षिण तथा दक्षिण पूर्व एशिया में जल प्रवाह पर अपने शोध के लिए विख्यात हैं। उनके अन्य उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैं:
- अनरूली वाटर्स: हाऊ रेन्स, रिवर्स, कोस्ट्स, एंड सीज़ हैव शेप्ड एशियाज़ हिस्ट्री (Unruly Waters: How Rains, Rivers, Coasts, and Seas Have Shaped Asia’s History), जिसे 2019 कन्डिल प्राइज़ (Cundill Prize) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।
- क्रॉसिंग द बे ऑफ बंगाल: द फ्यूरीज़ ऑफ नेचर एंड द फॉर्च्यून्स ऑफ माइग्रेंट्स (Crossing the Bay of Bengal: The Furies of Nature and the Fortunes of Migrants), जिसने 2014 का जॉन एफ. रिचर्ड्स प्राइज़ (John F. Richards Prize) जीता था।
अमृत की विद्वता की पहचान पर्यावरण परिवर्तन की कहानी में ग्लोबल साउथ (Global South) को केंद्र में रखने की उनकी प्रतिबद्धता से होती है। यह उन इतिहासों के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार है जो यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। ब्रिटिश एकेडमी अवार्ड के अलावा, उन्हें 2025 का टॉयबी प्राइज़ फॉर ग्लोबल हिस्ट्री (Toynbee Prize for Global History), 2024 का फुकुओका एकेडमिक प्राइज़ (Fukuoka Academic Prize), और 2017 का मैकआर्थर फेलोशिप (MacArthur Fellowship) सहित कई अन्य सम्मान प्राप्त हुए हैं।
पुरस्कार की महत्ता और जजों की प्रशंसा
ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ गैर-काल्पनिक साहित्य के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है। द बर्निंग अर्थ को शॉर्टलिस्ट में से चुना गया था, जिसमें जूरी ने पुस्तक की वैश्विक पहुंच, बौद्धिक महत्वाकांक्षा और समय की तात्कालिकता की ओर इशारा किया।
जूरी की अध्यक्ष, रेबेका अर्ल ने पुस्तक को "विवरण में स्पष्ट और खूबसूरती से लिखा गया" बताते हुए कहा कि यह "आज के जलवायु संकट की उत्पत्ति को समझने की तलाश करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण पठन" है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमृत एक उल्लेखनीय विद्वान हैं, जिनका वैश्विक दृष्टिकोण मानव इतिहास पर पर्यावरण के प्रभाव और पर्यावरण पर हमारे प्रभाव दोनों को प्रकट करता है। अर्ल के अनुसार, "वास्तव में इन दोनों को अलग करना संभव नहीं है"।
ब्रिटिश एकेडमी की अध्यक्ष, प्रोफेसर सुसान जे स्मिथ ने द बर्निंग अर्थ को "सबूत-सूचित अंतर्दृष्टि, सुविचारित विचारों और शानदार लेखन का सटीक संयोजन" बताया, जिसे एकेडमी सम्मानित करने में गर्व महसूस करती है। इस पुरस्कार का चयन, जो मूल रूप से 2013 में स्थापित किया गया था, यह सुनिश्चित करता है कि मानवीय और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान पर आधारित उत्कृष्ट कार्य सामने आएँ, जो अंग्रेजी में प्रकाशित हों, लेकिन लेखक दुनिया भर के हो सकते हैं।
पुस्तक का सार: 'द बर्निंग अर्थ' क्या कहती है
द बर्निंग अर्थ पर्यावरण इतिहास के 500 वर्षों की खोज करती है। अमृत दिखाते हैं कि कैसे उपनिवेशीकरण (colonization), औद्योगिक क्रांति (industrial revolutions), और मानवीय बस्तियों के बदलते पैटर्न ने न केवल समाजों को आकार दिया है, बल्कि ग्रह को भी गहराई से बदल दिया है। उनका कार्य दशकों के सावधानीपूर्वक शोध और एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर आधारित है, जिसमें ग्लोबल साउथ के अनुभवों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पुस्तक एक महाकाव्य यात्रा पर पाठकों को ले जाती है: अमेरिका की विजय और औपनिवेशिक साम्राज्यों के प्रसार से लेकर, दक्षिण अफ्रीका में सोने के खनन, ब्लैक डेथ के कहर, और औद्योगीकरण के नतीजों तक। अमृत परस्पर जुड़ी कहानियों को उजागर करते हैं: पीड़ा और सरलता, तबाही और लचीलापन—जिसमें हर युग में पर्यावरणीय परिणाम बुने हुए हैं।
मुख्य विषयवस्तु और जटिलता
न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि अमृत की पुस्तक जलवायु संकट की वास्तविक जटिलता को दर्शाती है—वैश्विक निर्भरता और ऐतिहासिक जड़ों पर जोर देती है—सरल समाधान पेश करने के बजाय। पुस्तक की प्रमुख विषयवस्तु में शामिल हैं:
- साम्राज्य और प्रवास की भूमिका: साम्राज्य (Empire) और प्रवास ने पर्यावरणीय नुकसान और नवाचारों दोनों को फैलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- पारिस्थितिक परिवर्तन के क्षेत्रीय अनुभव: इसमें तबाही और लचीलापन दोनों शामिल हैं।
- भूले हुए आंदोलन और प्रौद्योगिकियाँ: ये वे मार्ग थे जिन्होंने जीवन के अधिक टिकाऊ तरीकों की पेशकश की।
- मानव कल्याण और प्राकृतिक दुनिया के बीच जटिल, अटूट संबंध: यह दर्शाती है कि इन दोनों को अलग करना संभव नहीं है।
अमृत की यह व्याख्या जलवायु इतिहास की एक नई व्याख्या को आगे बढ़ाती है। वह दिखाते हैं कि पर्यावरण परिवर्तन शायद ही कभी आकस्मिक रहे हैं; नीति, लाभ और विचारधारा ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं।
आशा का संदेश: अनछुए रास्ते
भले ही द बर्निंग अर्थ पर्यावरणीय परिवर्तनों द्वारा किए गए नुकसान और पीड़ा को दर्शाती है, लेकिन यह आशा का संदेश भी देती है। अमृत स्वयं बताते हैं कि खोए हुए विचारों और अनछुए रास्तों पर फिर से विचार करके, मानवता पृथ्वी पर निवास करने के नए, अधिक टिकाऊ तरीके खोज सकती है।
पुरस्कार समारोह के दौरान, अमृत ने इस सवाल का सामना किया: क्या उनकी किताब निराशावादी है? उन्होंने अपने खाते में उजागर हुई क्षति और पीड़ा को स्वीकार किया लेकिन जोर देकर कहा कि अंतिम संदेश संभावनाओं का है। अमृत ने विचार व्यक्त किया:
“शायद हम उन अनछुए रास्तों पर लौटकर प्रेरणा के बीज पा सकते हैं, इस ग्रह पर एक साथ रहने के अधिक आशावादी और कम हिंसक तरीके के लिए, जिसे हम एक दूसरे के साथ और उन सभी अन्य जीवों के साथ साझा करते हैं जिन पर हम निर्भर हैं।”
वह सुझाव देते हैं कि जलवायु संकट का सामना करने का मतलब केवल भविष्य का आविष्कार करना नहीं है, बल्कि अतीत से भुला दिए गए विकल्पों को पुनः प्राप्त करना भी है। उन समुदायों के लचीलेपन में प्रेरणा है जो प्रकृति के साथ शालीनता से रहते थे; उन सामाजिक आंदोलनों में सबक हैं जो सफल हुए या विफल रहे; और उन प्रौद्योगिकियों में संभावनाएं हैं जिन्हें अधिक विनाशकारी प्रणालियों के लिए त्याग दिया गया था। उनकी पुस्तक विशेष रूप से उन "भूल गए आंदोलनों, मामूली प्रौद्योगिकियों, और 'अनछुए रास्तों' को ऊपर उठाती है" जो अधिक टिकाऊ जीवन जीने के तरीके प्रदान करते थे।
पुस्तक क्यों महत्वपूर्ण है
यह पुरस्कार ऐसे समय में आया है जब जलवायु बहस तत्काल और अनिवार्य है। कई लोग मानते हैं कि हमारा क्षण अद्वितीय है—लेकिन अमृत हमें याद दिलाते हैं कि आज का संकट सदियों से जुड़े फैसलों का उत्पाद है। वह इस बात को रेखांकित करते हैं कि पर्यावरणीय परिवर्तन अनिवार्य रूप से मानव इतिहास से जुड़ा हुआ है, और जलवायु न्याय को ऐतिहासिक समझ में निहित होना चाहिए।
द बर्निंग अर्थ कई कारणों से अलग है:
- वैश्विक दायरा: यह पांच सदियों और सभी बसे हुए महाद्वीपों तक फैला हुआ है।
- जटिलता और सूक्ष्मता: यह सरल कारणता से बचता है और अनपेक्षित परिणामों, अनुकूलन, और अनदेखी किए गए विकल्पों को पहचानता है।
- मानव-केंद्रित दृष्टिकोण: यह प्रभावित समुदायों, सामाजिक आंदोलनों, और औपनिवेशिक शक्ति की विरासत पर केंद्रित है।
- कार्रवाई योग्य आशा: यह अतीत के व्यावहारिक ज्ञान और कम प्रभाव वाली प्रौद्योगिकियों को पुनर्जीवित करके प्रेरणा प्रदान करता है।
अमृत का पांडित्य, जो एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के तुलनात्मक इतिहास और पर्यावरण और प्रवासन के परस्पर क्रिया पर सावधानीपूर्वक ध्यान देता है, ग्लोबल साउथ के अनुभवों पर प्रकाश डालता है।
प्रतियोगिता और संदर्भ
पुरस्कार जूरी ने छह असाधारण पुस्तकों की एक शॉर्टलिस्ट का सामना किया। हालांकि हर नामांकित पुस्तक को पहचान मिली, अमृत के काम को उसकी महत्वाकांक्षा और प्रभाव के लिए चुना गया। शॉर्टलिस्ट में शामिल अन्य उत्कृष्ट पुस्तकें थीं:
- द गोल्डन रोड: हाउ एंशिएंट इंडिया ट्रांसफॉर्म्ड द वर्ल्ड (The Golden Road: How Ancient India Transformed the World) विलियम डेलरिम्पल द्वारा।
- द बैटन एंड द क्रॉस: रशिया'ज चर्च फ्रॉम पैगन्स टू पुतिन (The Baton and The Cross: Russia's Church from Pagans to Putin) लूसी ऐश द्वारा।
- अफ्रीकोनॉमिक्स: ए हिस्ट्री ऑफ वेस्टर्न इग्नोरेंस (Africonomics: A History of Western Ignorance) ब्रोनवेन एवरिल द्वारा।
- सिक ऑफ इट: द ग्लोबल फाइट फॉर वूमेन्स हेल्थ (Sick of It: The Global Fight for Women’s Health) सोफी हरमन द्वारा।
- साउंड ट्रैक्स: ए म्यूजिकल डिटेक्टिव स्टोरी (Sound Tracks: A Musical Detective Story) ग्रीम लॉसन द्वारा।
निष्कर्ष: एक नया मार्ग प्रशस्त करना
द बर्निंग अर्थ नीति निर्माताओं, कार्यकर्ताओं और सामान्य पाठकों को एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करती है: इतिहास मायने रखता है। जलवायु आपातकाल के समाधानों को न केवल वर्तमान विज्ञान के साथ, बल्कि वैश्विक अंतर्संबंध, प्रवासन, तकनीकी परिवर्तन, और भूली हुई पीढ़ियों के विकल्पों के साथ भी तालमेल बिठाना होगा।
सुनील अमृत की यह अभूतपूर्व इतिहास कृति केवल आपदा का एक इतिहास नहीं है—यह नवीनीकरण के लिए एक मार्गदर्शिका है। पृष्ठ पलटने वाली गद्य को साक्ष्य-आधारित अंतर्दृष्टि के साथ मिलाकर, द बर्निंग अर्थ ऐतिहासिक चिंतन में निहित टिकाऊ जीवन के लिए रास्ते खोजने के लिए एक नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। उनका दृष्टिकोण—कि मानव और पर्यावरणीय इतिहास अविभाज्य हैं, और हमारा सर्वश्रेष्ठ भविष्य हमारे अतीत में पाया जा सकता है—जलवायु संकट को समझने और संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध किसी भी व्यक्ति के लिए एक सामयिक सबक प्रदान करता है।
अमृत की विजय गहरे चिंतन, व्यापक करुणा और नवीनीकृत आशा का आह्वान है। उनका काम हमें न केवल तकनीकी समाधान खोजने के लिए कहता है, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे संबंधों को आकार देने में खोए हुए विचारों पर लौटने और विनम्रता को अपनाने के लिए भी कहता है—एक संदेश जो पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
सुनील अमृत की पुस्तक पर 50 प्रश्न-उत्तर (50 Q&A based on the sources)
प्रश्न: प्रोफेसर सुनील अमृत ने अपनी किस पुस्तक के लिए 2025 का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है?
उत्तर: उन्होंने अपनी पुस्तक द बर्निंग अर्थ: एन एन्वायरनमेंटल हिस्ट्री ऑफ द लास्ट 500 इयर्स (The Burning Earth: An Environmental History of the Last 500 Years) के लिए पुरस्कार जीता है।
प्रश्न: सुनील अमृत ने कौन सा प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है?
उत्तर: उन्होंने 2025 का ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ जीता है।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ को किस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना गया है?
उत्तर: इसे जलवायु इतिहास (climate history) में एक महत्वपूर्ण और अग्रणी कार्य (groundbreaking work) माना गया है।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ किसके बीच अंतरसंबंधों की पड़ताल करती है?
उत्तर: यह मानवीय गतिविधि, उपनिवेशीकरण (colonialism), औद्योगीकरण (industrialization), और हमारे ग्रह के पर्यावरण के विकास के बीच अंतरसंबंधों की पड़ताल करती है।
प्रश्न: ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ की पुरस्कार राशि कितनी है?
उत्तर: पुरस्कार राशि £25,000 है।
प्रश्न: न्यायाधीशों के अनुसार, द बर्निंग अर्थ ने किस बात का शानदार विवरण प्रस्तुत किया है?
उत्तर: यह "मानव इतिहास और पर्यावरणीय परिवर्तन के बीच अंतरसंबंधों का एक शानदार विवरण" (magisterial account) प्रस्तुत करती है。
प्रश्न: जूरी की अध्यक्ष कौन थीं, जिन्होंने पुस्तक की प्रशंसा की?
उत्तर: जूरी की अध्यक्ष रेबेका अर्ल (Rebecca Earle) थीं。
प्रश्न: रेबेका अर्ल ने पुस्तक को किस प्रकार का पठन बताया?
उत्तर: उन्होंने इसे "आज के जलवायु संकट की उत्पत्ति को समझने की तलाश करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण पठन" कहा।
प्रश्न: प्रोफेसर सुनील अमृत किस विश्वविद्यालय से संबंधित हैं?
उत्तर: वह येल विश्वविद्यालय (Yale University) में इतिहास के प्रोफेसर हैं।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ कितने वर्षों के पर्यावरणीय इतिहास पर प्रकाश डालती है?
उत्तर: यह 500 वर्षों के पर्यावरणीय इतिहास की पड़ताल करती है।
प्रश्न: सुनील अमृत ने अपनी पुस्तक के संदेश के बारे में क्या कहा, भले ही यह नुकसान को दर्शाती है?
उत्तर: उन्होंने कहा कि इसमें आशा का संदेश है कि अनछुए रास्तों पर फिर से विचार करके, मानवता पृथ्वी पर निवास करने के नए, अधिक टिकाऊ तरीके खोज सकती है।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ किस क्षेत्र के अनुभवों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है?
उत्तर: यह ग्लोबल साउथ (Global South) के अनुभवों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
प्रश्न: पुस्तक के मुख्य विषयों में साम्राज्य (empire) और प्रवास (migration) की क्या भूमिका बताई गई है?
उत्तर: साम्राज्य और प्रवास ने पर्यावरणीय नुकसान और नवाचारों (innovations) दोनों को फैलाने में भूमिका निभाई।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ के अनुसार, पर्यावरणीय परिवर्तन के क्षेत्रीय अनुभवों में क्या शामिल है?
उत्तर: इसमें तबाही (devastation) और लचीलापन (resilience) दोनों शामिल हैं।
प्रश्न: अमृत ने किन 'भूले हुए' तत्वों पर ध्यान केंद्रित किया है जो टिकाऊ जीवन की पेशकश करते थे?
उत्तर: भूले हुए आंदोलनों और प्रौद्योगिकियों (forgotten movements and technologies) पर।
प्रश्न: पुस्तक किस बात पर जोर देती है कि मानव कल्याण और प्राकृतिक दुनिया के बीच संबंध कैसा है?
उत्तर: यह जटिल और अटूट (complex, inseparable) है।
प्रश्न: न्यायाधीशों ने जलवायु संकट के चित्रण के बारे में किस बात पर जोर दिया?
उत्तर: अमृत की पुस्तक जलवायु संकट की वास्तविक जटिलता को दर्शाती है और सरल समाधानों से बचती है।
प्रश्न: सुनील अमृत का जन्म कहाँ हुआ था और उनका पालन-पोषण कहाँ हुआ?
उत्तर: उनका जन्म केन्या में हुआ था, और उनका पालन-पोषण सिंगापुर में हुआ।
प्रश्न: सुनील अमृत के माता-पिता कहाँ के थे?
उत्तर: वह दक्षिण भारतीय माता-पिता के पुत्र हैं।
प्रश्न: अमृत के मुख्य शोध फोकस क्षेत्र क्या हैं?
उत्तर: वह पर्यावरण इतिहास, प्रवासन (migration), और दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में जल प्रवाह (flows of water) पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
प्रश्न: ब्रिटिश एकेडमी पुरस्कार के अलावा, अमृत को 2025 में कौन सा अन्य पुरस्कार मिला?
उत्तर: उन्हें 2025 का टॉयबी प्राइज़ फॉर ग्लोबल हिस्ट्री (Toynbee Prize for Global History) प्राप्त हुआ।
प्रश्न: सुनील अमृत को 2017 में कौन सी प्रतिष्ठित फेलोशिप मिली थी?
उत्तर: उन्हें 2017 का मैकआर्थर फेलोशिप (MacArthur Fellowship) प्राप्त हुआ।
प्रश्न: अमृत के किस पूर्व कार्य को 2019 कन्डिल प्राइज़ के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था?
उत्तर: अनरूली वाटर्स (Unruly Waters)।
प्रश्न: क्रॉसिंग द बे ऑफ बंगाल (Crossing the Bay of Bengal) ने कौन सा पुरस्कार जीता था?
उत्तर: इसने 2014 का जॉन एफ. रिचर्ड्स प्राइज़ जीता था।
प्रश्न: अमृत की विद्वता की पहचान क्या है?
उत्तर: पर्यावरण परिवर्तन की कहानी में ग्लोबल साउथ को केंद्र में रखने की उनकी प्रतिबद्धता।
प्रश्न: अमृत के अनुसार, यह प्रतिबद्धता क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह उन इतिहासों के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार (corrective) है जो यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
प्रश्न: रेबेका अर्ल ने मानव इतिहास और पर्यावरण के संबंध के बारे में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि इन दोनों (मानव इतिहास पर पर्यावरण का प्रभाव और पर्यावरण पर हमारा प्रभाव) को अलग करना वास्तव में संभव नहीं है।
प्रश्न: अमृत के अनुसार, आज का संकट किसका परिणाम है?
उत्तर: यह सैकड़ों वर्षों के विकल्पों (hundreds of years of choices) का परिणाम है।
प्रश्न: अमृत का कार्य पाठकों को किस चीज़ के लिए प्रेरित करता है?
उत्तर: यह गहन ऐतिहासिक सोच और पर्यावरण के प्रति विनम्रता (deeper historical thinking and humility toward the environment) के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ में वर्णित 'आशा के बीज' कहाँ पाए जा सकते हैं?
उत्तर: उन "अनछुए रास्तों पर लौटकर" (returning to those paths not taken)।
प्रश्न: ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ गैर-काल्पनिक साहित्य के लिए किस प्रकार का सम्मान है?
उत्तर: यह दुनिया के सबसे सम्मानित सम्मानों में से एक है।
प्रश्न: ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: इसकी स्थापना 2013 में हुई थी।
प्रश्न: ब्रिटिश एकेडमी की अध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर: प्रोफेसर सुसान जे स्मिथ।
प्रश्न: सुसान जे स्मिथ ने द बर्निंग अर्थ की प्रशंसा कैसे की?
उत्तर: उन्होंने इसे "सबूत-सूचित अंतर्दृष्टि, सुविचारित विचारों, और शानदार लेखन का सटीक संयोजन" कहा।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ में अमृत पाठकों को किस महाकाव्य यात्रा पर ले जाते हैं?
उत्तर: अमेरिका की विजय, औपनिवेशिक साम्राज्यों के प्रसार, दक्षिण अफ्रीका में सोने का खनन, ब्लैक डेथ के कहर, और औद्योगीकरण के नतीजों पर।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ किस प्रकार की कहानी कहने के लिए जानी जाती है?
उत्तर: यह आपस में जुड़ी हुई कहानियों को उजागर करती है, जिसमें पीड़ा और सरलता, तबाही और लचीलापन शामिल है, और हर युग में पर्यावरणीय परिणाम बुने हुए हैं।
प्रश्न: अमृत की पुस्तक के अनुसार, पर्यावरण परिवर्तन की प्रक्रिया में किन चीजों ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं?
उत्तर: नीति (policy), लाभ (profit), और विचारधारा (ideology) ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं।
प्रश्न: अमृत ने पुस्तक को लेकर किस बात पर जोर दिया कि इसका संदेश निराशावादी नहीं है?
उत्तर: उन्होंने स्वीकार किया कि इसमें नुकसान और पीड़ा है, लेकिन जोर दिया कि अंतिम संदेश संभावनाओं (possibility) का है।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ में कौन सा पहलू पुस्तक को अलग करता है?
उत्तर: इसका वैश्विक दायरा, जो पाँच सदियों और सभी बसे हुए महाद्वीपों तक फैला है।
प्रश्न: पुस्तक जटिलता और सूक्ष्मता कैसे दिखाती है?
उत्तर: यह सरल कारणता से बचती है और अनपेक्षित परिणामों, अनुकूलन, और अनदेखी किए गए विकल्पों को पहचानती है।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ का दृष्टिकोण कैसा है?
उत्तर: यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाती है, जो प्रभावित समुदायों, सामाजिक आंदोलनों, और औपनिवेशिक शक्ति की विरासतों पर केंद्रित है।
प्रश्न: पुस्तक किस प्रकार की आशा प्रदान करती है?
उत्तर: यह अतीत के व्यावहारिक ज्ञान और कम प्रभाव वाली प्रौद्योगिकियों (low-impact technologies) को पुनर्जीवित करके कार्रवाई योग्य आशा प्रदान करती है।
प्रश्न: शॉर्टलिस्ट में शामिल विलियम डेलरिम्पल की पुस्तक का नाम क्या था?
उत्तर: द गोल्डन रोड: हाउ एंशिएंट इंडिया ट्रांसफॉर्म्ड द वर्ल्ड।
प्रश्न: शॉर्टलिस्ट में शामिल सोफी हरमन की पुस्तक का नाम क्या था?
उत्तर: सिक ऑफ इट: द ग्लोबल फाइट फॉर वूमेन्स हेल्थ।
प्रश्न: शॉर्टलिस्ट में शामिल ब्रोनवेन एवरिल की पुस्तक का नाम क्या था?
उत्तर: अफ्रीकोनॉमिक्स: ए हिस्ट्री ऑफ वेस्टर्न इग्नोरेंस।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ नीति निर्माताओं और पाठकों के लिए किस अनुस्मारक के रूप में कार्य करती है?
उत्तर: यह अनुस्मारक है कि इतिहास मायने रखता है (history matters)।
प्रश्न: अमृत के अनुसार, जलवायु संकट का सामना करने के लिए भविष्य का आविष्कार करने के अलावा और क्या आवश्यक है?
उत्तर: अतीत से भुला दिए गए विकल्पों को पुनः प्राप्त करना (reclaiming forgotten alternatives)।
प्रश्न: द बर्निंग अर्थ किस प्रकार की लेखन शैली के लिए जानी जाती है?
उत्तर: न्यायाधीशों ने इसकी "खूबसूरत लेखन" शैली की प्रशंसा की, जो कहानी कहने को संग्रहणीय शोध और सुलभ विश्लेषण के साथ एकीकृत करती है।
प्रश्न: अमृत के अनुसार, मानवता को किस प्रकार का मार्ग खोजना चाहिए?
उत्तर: इस ग्रह पर एक साथ रहने के लिए अधिक आशावादी और कम हिंसक तरीके।
प्रश्न: अमृत की पुस्तक के द्वारा ब्रिटिश एकेडमी क्या दर्शाती है?
उत्तर: यह पर्यावरण संबंधी विद्वता के बढ़ते महत्व को दर्शाती है, जो समाज की 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के तरीके को आकार देती है।

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